शतदल के खिलने मे आपका सहयोग अपेक्षित है।
कार्येषु दासी
करणेषु मन्त्री
रुपेच लक्ष्मी
क्षमया धरित्रि
भोज्येषु माता
,
शयनेषु रम्भा,
षटकर्म युक्ता
कुलधर्म पत्नी
स्त्री अपने विभिन्न रुपों में सदा
सदा से पुरुषों का नेत्रित्व करती आई है। परन्तु वह
नासमझ पुरुष स्वयं को सर्वशक्तिमान मानकर अपने में
इतराता रहा है। हाय रे,पुरुष!तुझे इतनी भी समझ
नही?तू जन्म से लेकर म्रृत्युपर्यंत नारी की गोद ही
खोजता है फ़िर भी??????????????????????????????????????
Saturday, November 21, 2009
Monday, November 9, 2009
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