Monday, January 11, 2010

यथार्थ

कन्यादान महादान है। ऐसा सभी कहते हैं। मोक्ष पाने के लिऐ जीवन में एक बार कन्यादान अवश्य करना चाहिये। अपनी न सही, किसी और की कन्या ही सही। पर जिनकी बेटियां कोर्ट में विवाह कर लेती है,उनकी माँएं किस मंड्प में कौन से अक्षत और स्वर्ण को हाथ में लेकर अपनी पुत्री का हाथ एक योग्य पुरुष के हाथ में सौपती होंगी। कभी -कभी अक्सर वैसी बेटियां तो स्वयं का ही दान कर देतीं हैं,एक ऐसे पुरुष के हाथ जो योग्य हो न हो पर पुरुष है, मात्र पुरुष। पुरुषार्थ हो न पशुत्व अवश्य होता है ।

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